भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन इसका ढांचा (skeleton) आज भी 1935 के Government of india act' पर टिकी हुई है सुप्रीम कोर्ट हो संसद हो या हमारे कानून(IPC, CrPC ) इन सबकी जड़े लंदन के Westminster model से जुड़ी हैं.आज के इस लेख में हम विचार करेंगे कि कितनी "अँग्रेजियत" आज भी हमारे system में बाकी है.
1.सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका( Judiciary)
• ब्रिटिश काल: 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत कलकत्ता में पहला सुप्रीम कोर्ट। बना.फिर 1935 में 'फेडरल कोर्ट' बना.
•आधुनिक भारत: 28 जनवरी 1950 को वही फेडरल कोर्ट भारत का सुप्रीम कोर्ट बना
•तुलना: अंग्रेजों ने न्यायपालिका को अपने फायदे के लिए बनाया था,लेकिन आज हमारा सुप्रीम कोर्ट "fundamental Right" का रक्षक है. लेकिन "Lordship" कहना और कोर्ट की भासा आज भी वही पुरानी है.
2. संसदीय प्रणाली (संसदीय प्रणाली):
विरासत: हमने ब्रिटेन से "Westminster model" लिया-यानी लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति (जो वहां किंग/क्वीन होते हैं)।
बदलाव: ब्रिटेन में "संसद सर्वोच्च है" (संसद सबसे ऊपर है), लेकिन भारत में "संविधान (संविधान) सर्वोच्च है"। हमने उनकी नकल की लेकिन हमें "चेक एंड बैलेंस" डाल दिया
3. आईपीसी और सीआरपीसी (कानून एवं व्यवस्था):
पुराना मामला: 1860 में लॉर्ड मैकाले ने आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) बनाया था। देशद्रोह (Sedition) jaise kanoon unhone hume dabane ke liye Banaye the.
नया मोड़ (2024-26 अपडेट): भारत सरकार ने अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू करके पुराने IPC/CrPC में बड़ा बदलाव किया है। हलाकी कोर वही है, लेकिन नाम और कुछ धारें बदल गई हैं।
4. प्रशसन (सिविल सेवा - आईएएस/आईपीएस):
तथ्य: सरदार पटेल ने आईएएस को "स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया" कहा था, लेकिन इसे शुरू करने वाले अंग्रेज (लॉर्ड कॉर्नवालिस) थे। पहले ये "आईसीएस" (इंपीरियल सिविल सर्विस) था जो सिर्फ टैक्स वसूलने के लिए था, आज ये "पब्लिक सर्विस" के लिए है।
निष्कर्ष (Conclusion):
हमने अंग्रेजों की दी हुई गाड़ी (System) तो राखी, लेकिन उसका इंजन (विचारधारा) बदल दिया। आज हमारी राजव्यवस्था "शासन" (शासन) के लिए नहीं बल्कि "कल्याण" (लोक-कल्याण) के लिए है।
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